दिव्यांग युवती को शासकीय सहायता एवं पुनर्वास दिलाने हेतु व्यक्तिगत पहल

मेरा प्रयास केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर मैंने व्यक्तिगत स्तर पर भी उनके पुनर्वास एवं शासकीय सहायता दिलाने का कार्य किया।
मुझे एक दिव्यांग युवती सुनीता के बारे में जानकारी मिली, जिसके पिता का निधन हो चुका था। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी तथा उनकी माता गंभीर रूप से अस्वस्थ होकर बिस्तर पर थीं। परिवार के समक्ष आजीविका एवं दैनिक जीवन-यापन का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था।
स्थिति को देखते हुए मैंने स्वयं पहल करते हुए सबसे पहले अपने परिवार के सदस्यों के सहयोग से उनका दिव्यांगता प्रमाण-पत्र (Disability Certificate) बनवाया। इसके पश्चात एक सामाजिक संस्था के सहयोग से उन्हें ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई, जिससे उनकी आवाजाही सुगम हो सकी और वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकीं।
इसके बाद मैंने उन्हें शासकीय आर्थिक सहायता दिलाने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री जी के नाम आवेदन तैयार कराया तथा जनदर्शन के माध्यम से प्रकरण प्रस्तुत किया। इस प्रकरण के संबंध में मुख्यमंत्री सचिवालय, कलेक्टर कार्यालय, अतिरिक्त तहसीलदार एवं संबंधित विभागों के साथ निरंतर पत्राचार, अनुवर्ती कार्रवाई एवं समन्वय किया। मेरे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रकरण का परीक्षण पूर्ण हुआ तथा दिव्यांग युवती को मुख्यमंत्री सहायता निधि से आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की प्रक्रिया स्वीकृति के अंतिम चरण तक पहुँच गई।
इस पहल का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति की सहायता करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि यदि सही मार्गदर्शन, संवेदनशीलता और निरंतर प्रयास किए जाएँ, तो दिव्यांगजन भी शासन की विभिन्न योजनाओं एवं अधिकारों का लाभ प्राप्त कर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकते हैं।




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