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एक छोटा सा पहल : दिव्यांग युवती सुनीता के लिए

  • Writer: k sharda
    k sharda
  • Jan 9
  • 2 min read

यह दिव्यांग युवती सुनीता है। इनके पिता पूर्व में सोडा बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। जब तक पिता जीवित रहे, परिवार का जीवन यापन किसी प्रकार हो रहा था, किंतु पिता के निधन के पश्चात परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई।

सुनीता की माता की आयु लगभग 70 वर्ष से अधिक है एवं गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के कारण बिस्तर पर ही रहती हैं। परिवार में कोई अन्य कमाने वाला सदस्य नहीं है। स्वयं सुनीता भी अपनी दिव्यांगता के कारण चलने-फिरने में असमर्थ है, जिसके कारण वह कहीं जाकर कार्य करने अथवा शासकीय प्रक्रियाएँ पूर्ण करने की स्थिति में नहीं है।

पूर्व में समाजसेवी सहयोग से सुनीता को ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई थी, किंतु समय पर दिव्यांगता प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण न हो पाने के कारण उसकी दिव्यांग पेंशन बंद हो गई, जिससे परिवार की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।



दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के नवीनीकरण में मुख्य बाधा यह रही कि

माता स्वयं ले जाने की स्थिति में नहीं थीं

सुनीता की शारीरिक स्थिति भी यात्रा योग्य नहीं थी

इसी कारण यह प्रयास लंबे समय तक बाधित रहा।

वर्तमान में इस मानवीय कार्य को पुनः आगे बढ़ाने हेतु परिवार एवं समाज के सहयोग से सबका ने मिलकर प्रयास किया। विशेष रूप से इस नेक कार्य में मेरे दोनों भाई – कोड़ा श्रीनु, कोड़ा राजा राव तथा मेरी बहन भानु, सबका ने एकजुट होकर सहयोग प्रदान किया, जिनके सामूहिक प्रयास से आज सुनीता को शासकीय अस्पताल, दुर्ग लाया जा सका।

यहाँ सुनीता हेतु

दिव्यांगता प्रमाण-पत्र का नवीनीकरण

रेलवे रियायत प्रमाण-पत्र

बैसाखियाँ

एवं मोटर चालित ट्राइसाइकिल

प्रदान किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

यह समस्त प्रयास केवल इस उद्देश्य से किया जा रहा है कि सुनीता को दिव्यांग पेंशन एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ पुनः प्राप्त हो सके और उसका जीवन सम्मानजनक व आत्मनिर्भर बन सके।

 
 
 

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