दिव्यांगजनों के लिए स्वरोजगार हेतु ऋण योजना बनी आत्मनिर्भरता का माध्यम

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से स्वरोजगार हेतु ऋण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के ऐसे दिव्यांगजन, जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है तथा जिनकी आयु 18 से 60 वर्ष के बीच है, लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक छत्तीसगढ़ का निवासी होना चाहिए। साथ ही, वार्षिक पारिवारिक आय शहरी क्षेत्र में 5 लाख रुपये तथा ग्रामीण क्षेत्र में 3 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
योजना के तहत स्वरोजगार, सेवा आधारित गतिविधियों एवं उत्पादन कार्यों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है। 50 हजार रुपये तक के ऋण पर 5 प्रतिशत, 5 लाख रुपये तक के ऋण पर 6 प्रतिशत तथा 5 लाख रुपये से अधिक के ऋण पर 8 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित की गई है। पात्र हितग्राहियों को अधिकतम 25 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जा सकता है।
इस योजना की निगरानी समाज कल्याण विभाग द्वारा की जाती है तथा ऋण की वापसी आसान किश्तों में की जाती है। शासन की यह पहल दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।




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