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विदेश में पढ़ाई का सपना होगा साकार: दिव्यांगजनों के लिए ‘राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप’ योजना

  • Writer: k sharda
    k sharda
  • Apr 5, 2025
  • 2 min read

दिव्यांगजनों के लिए उच्च शिक्षा और करियर के नए अवसर खोलने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने ‘राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप’ (National Overseas Scholarship - NOS) योजना को विशेष रूप से लागू किया है। इस योजना के तहत दिव्यांग छात्र विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

Scholarship

क्या है राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना?


यह योजना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत आने वाले पात्र छात्रों को विदेश में मास्टर डिग्री या पीएचडी करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस छात्रवृत्ति का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।


कौन कर सकता है आवेदन?


इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तें हैं:


योग्यता: मास्टर डिग्री के लिए बैचलर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक और पीएचडी के लिए मास्टर डिग्री में न्यूनतम 55% अंक आवश्यक हैं।


आयु सीमा: आवेदन करने वाले उम्मीदवार की आयु चयन वर्ष की पहली अप्रैल को 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।


आर्थिक स्थिति: अभ्यर्थी के परिवार की कुल वार्षिक आय ₹8 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।


पात्रता: केवल वे छात्र जिनकी विकलांगता दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सूचीबद्ध है, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।



क्या-क्या मिलेगा योजना के तहत?


ट्यूशन फीस, वीजा शुल्क, हेल्थ इंश्योरेंस और यात्रा खर्च की पूरी राशि सरकार द्वारा दी जाएगी।


मास्टर डिग्री के छात्रों को सालाना 15,400 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹12.8 लाख) का वजीफा मिलेगा।


पीएचडी छात्रों को सालाना 15,400 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹12.8 लाख) की आर्थिक सहायता मिलेगी।


विदेश जाने से पहले एकमुश्त 1,500 अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹1.2 लाख) का अनुदान दिया जाएगा।



कैसे करें आवेदन?


इच्छुक छात्र राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करना अनिवार्य होगा।


सरकार की पहल से दिव्यांगजनों को मिलेगा नया अवसर


दिव्यांगजनों के लिए यह योजना एक सुनहरा अवसर है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त कर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। सरकार की यह पहल दिव्यांगजनों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।


अगर आप या आपके जानने वाले कोई दिव्यांग छात्र विदेश में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, तो इस योजना का लाभ जरूर उठाएं!

 
 
 

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