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विश्व ब्रेल दिवस पर राज्य स्तरीय वेबिनार में ब्रेल शिक्षा पर हुई सार्थक चर्चा

  • Writer: k sharda
    k sharda
  • Jan 4
  • 2 min read

विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर 4 जनवरी को दृष्टिबाधित व्यक्तियों की शिक्षा, अधिकार और समावेशन को लेकर एक राज्य स्तरीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रपति से पुरस्कृत शिक्षक के. शारदा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से शिक्षकों, समाजसेवियों और विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता की।

वेबिनार के दौरान ब्रेल लिपि के महत्व और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए के. शारदा ने कहा कि ब्रेल केवल पढ़ने-लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है। इसी क्रम में शांति सोनी ने ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल के जीवन और उनके संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार एक नवाचार ने विश्वभर में दृष्टिबाधित समुदाय के जीवन में बदलाव लाया।



दृष्टिबाधितों की शिक्षा में ब्रेल की भूमिका पर बोलते हुए शिवकुमार बंजारे ने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक ब्रेल की भूमिका आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं श्रीमती ममता सिंह ने समावेशी शिक्षा के संदर्भ में ब्रेल को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

डिजिटल युग में ब्रेल के सामने आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं पर स्मृति दुबे ने विचार रखे। उन्होंने कहा कि तकनीक के विकास के साथ-साथ ब्रेल के नए स्वरूप सामने आ रहे हैं, जिनका सही उपयोग समय की मांग है। इसी विषय पर मंजु साहू ने ब्रेल और ऑडियो तकनीक के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।

ब्रेल से आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसरों पर चर्चा करते हुए समीक्षा गायकवाड़ ने कहा कि ब्रेल साक्षरता से दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के नए अवसर खुलते हैं। वहीं वीरेंद्र कुमार ने ब्रेल साक्षरता को अधिकार बताते हुए इसे प्रत्येक दृष्टिबाधित व्यक्ति तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत में ब्रेल शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर कमलेश लांझे ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में प्रयास जारी हैं, लेकिन संसाधनों और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता को और मजबूत करने की जरूरत है।

दिव्यांगजनों के अधिकारों पर बोलते हुए प्रीति शांडिल्य ने कहा कि ब्रेल की सुलभता सुनिश्चित करना सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं यशवंत कुमार पटेल ने ब्रेल लिपि के सामाजिक प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए इसे सामाजिक समावेशन का सशक्त माध्यम बताया।

कार्यक्रम में बच्चों में ब्रेल शिक्षा को बढ़ावा देने पर सुशील कुमार पटेल (व्याख्याता) ने अपने सुझाव साझा किए, जबकि श्रीमती ज्योति सराफ ने माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

नई तकनीक पर चर्चा करते हुए लक्ष्मण बांधेकर ने स्मार्ट ब्रेल डिवाइस की जानकारी दी। वहीं महेन्द्र कुमार चन्द्रा ने भविष्य की ब्रेल शिक्षा, नीति और नवाचार पर अपने विचार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से साझा किए।

कार्यक्रम का संचालन अमरदीप भोगल एवं चानी ये ऐरी ने किया। अंत में आयोजकों ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ब्रेल साक्षरता और दिव्यांगजनों के अधिकारों को मजबूती प्रदान करते हैं।

 
 
 

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